Thursday, April 23, 2020

सूक्ष्मदर्शी | microscope | function of simple microscope in hindi | function of joint microscope in hindi

सरल आवर्धक अथवा सरल सूक्ष्मदर्शी/सरल सूक्ष्मदर्शी की कार्य विधि (function of simple microscope in hindi, function of joint microscope in hindi)


सरल आवर्धक अथवा सरल सूक्ष्मदर्शी कम फोकस दूरी का एक अभीसारी लेंस होता है। इस प्रकार के लेंस को सूक्ष्मदर्शी के रूप में प्रयोग करने के लिए, लेंस को बिंब के निकट उससे एक फोकस दूरी अथवा उससे कम फोकस दूरी पर रखा जाता है तथा दूसरी ओर नेत्र को लेंस से सटाकर रखा जाता है, ऐसा करने से बिंब का सीधा, आवर्धित तथा आभासी प्रतिबिंब किसी ऐसी दूरी पर बने की नेत्र उस आसानी से देख सके, अर्थात प्रतिबिंब 25 cm अथवा कुछ अधिक दूरी पर बनना चाहिए। 

यदि बिंब f पर स्थित है तो उसका प्रतिबिंब अनंत पर बनता है तथा बिंब f से कम दूरी पर रखा हो तो प्रतिबिंब आभासी तथा अनंत की तुलना में कम दूरी पर बनता है। इसलिए देखने के लिए निकटतम आरामदेह दूरी, निकट बिंदु (दूरी D = 25cm) पर होती है, परन्तु इससे नेत्र पर कुछ प्रभाव पड़ता है, इसलिए अनंत पर बना प्रतिबिंब नेत्रों द्वारा देखने के लिए उचित माना जाता है।


प्रतिबिंब द्वारा नेत्र पर अंतरित कोण तथा बिंब u दूरी पर है
h'/h = m = v/u से प्रतिबिंब द्वारा नेत्र पर अंतरित कोण
tanθ = h'/-v
tanθ = h'/-v = (h/-v)(v/u) = h/-u ≈ θ
बिंब द्वारा अंतरित कोण, जबकि बिंब अब u=-f पर है
qi = h/f
m = (qi/q0)
m = D/f
यह उस स्थिति के आवर्धन कि तुलना में एक कम है जिससे प्रतिबिंब निकट बिंदु पर बनता है, समी.(1), परन्तु प्रतिबिंब देखना अपेक्षाकृत अधिक आरामदायक होता है तथा आवर्धन में अंतर भी अपेक्षाकृत कम है।

संयुक्त सूक्ष्मदर्शी / संयुक्त सूक्ष्मदर्शी की कार्यविधि (joint microscope/function of joint microscope)---


वास्तविक फोकस दूरियों के लेंसन के लिए किसी सरल सूक्ष्मदर्शी का अधिक आवर्धन (≤9) होता है। अधिक आवर्धन के लिए दो लेंसी का उपयोग किया जाता है जिनमे एक लेंस दूसरे लेंस के प्रभाव को संयुक्त (बढ़ता) करता है। 

इसे संयुक्त सूक्ष्मदर्शी कहते हैं। बिंब के सबसे निकट के लेंस को अभिदृष्यक(objective) कहते हैं जो बिंब का वास्तविक, उल्टा तथा आवर्धित प्रतिबिंब बनता है। यह प्रतिबिंब दूसरे लेंस के लिए बिंब का कार्य करता है। इस लेंस को नेत्रिका (eye-piece) कहते है। 
जो वास्तविक रूप से सरल सूक्ष्मदर्शी अथवा आवर्धक के रूप में कार्य करके अंतिम आवर्धित आभासी प्रतिबिंब बनता है। इस प्रकार पहला उल्टा प्रतीबिंब नेत्रिका के फोकस बिंदु के पास या इसके अंदर होता है यह नेत्रिका से इतनी दूरी पर होता है जो अंतिम प्रतिबिंब को अनंत पर बनाने के लिए उपयुक्त होता है।


किरण आरेख यह दर्शाता है कि अभीदृष्यक के कारण रैखिक आवर्धन अर्थात h'/h बराबर है।
m0 = h'/h = L/f0 ---------(1)
यह इस परिमाण का प्रयोग किया गया है
tan b = (h/f0) = (h'/L)
यहां h' पहले प्रतिबिंब का साइज है तथा बिंब का साइज h एवं अभिदृष्य की फोकस दूरी f0 है पहला प्रतिबिंब नेत्रिका के फोकस बिंदु के निकट बनता है। दूरी L, अर्थात, अभिदृष्यक के द्वितीय फोकस बिंदु तथा नेत्रिका (फोकस दूरी fe) के के पहले फोकस बिंदु के बीच की दूरी को संयुक्त सूक्ष्मदर्शी की ट्यूब लंबाई कहते हैं। 
क्योंकि पहला उल्टा प्रतिबिंब नेत्रिका के फोकस बिंदु के निकट बनता है।
कोणीय आवर्धन,
me = (1+D/fe)
जब प्रतिबिंब अनंत पर बनता है तो नेत्रिका के कारण कोणीय आवर्धन
me = D/fe ---------(2)
अतः कुल आवर्धन
m = m0.me =(L/f0) (D/fe) 
समी.(1) तथा (2) से

उदाहरण---

किसी f0 = 1cm के अभिद्रिष्यक, fe = 2cm की नेत्रिका तथा ट्यूब की लंबाई L = 20cm के लिए संयुक्त सूक्ष्मदर्शी का आवर्धन क्या होगा ? (D=25 cm)
हल-
m = m0.me= (L/f0) (D/fe)
m = (20/1)(25/2)
m = 20 × 25/2
m = 250 D 



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