Saturday, April 18, 2020

प्रकाश | प्रकाश का परावर्तन तथा अपवर्तन


प्रकाश एक ऐसा माध्यम है जिसकी सहायता से हम किसी भी वस्तुओं को देखने में सच्छम होते हैं ।
प्रकाश की अनुपस्थिति में हम किसी भी वस्तु को देख नहीं सकतें क्योंकि जब किसी वस्तु पर प्रकाश पड़ती है तो वो परावर्तित होकर हमारी आंखो तक आती हैं तो हमें उस वस्तु के होने का आभास होता है।

प्रकाश का परावर्तन

जब प्रकाश की किरण गमन करती हुई किसी परावर्तक पृष्ठ से टकराती है तो वह उसी माध्यम में वापस लौट जाती है अथवा परावर्तित हो जाती है, तो इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।

परावर्तन का नियम

प्रकाश के परावर्तन के दो नियम हैं
1.आपतन कोण, परावर्तन कोण के बराबर होता है।
2.आपातित किरण, परावर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब तीनों एक ही तल पर नियंत्रित होते हैं।

गोलीय दर्पण

ऐसे दर्पण जिसका परावर्तक पृष्ठ गोलीय हो, दर्पण कहलाता है।

अवतल दर्पण

वह गोलीय दर्पण जिसका परावर्तक पृष्ठ अंदर की ओर वक्रित हो, तो वह दर्पण अवतल दर्पण कहलाता है।

उत्तल दर्पण

वह गोलीय दर्पण जिसका परावर्तक पृष्ठ बाहर की ओर वक्रित हो, तो वह दर्पण उत्तल दर्पण कहलाता है।

दर्पण के लिए समीकरण / सिद्ध 1/f = 1/v + 1/u

∠ABC = ∠CB'A' = 90°
∠BCA = ∠B'CA'
अर्थात,
∆ABC और ∆A'B'C समरूप हैं।
AB/A'B' = AC/A'C -------------- (1)
इसी प्रकार,
∆A'B'F और ∆FNM समरूप हैं।
MN/A'B' = FN/A'F ------------ (2)
MN = AB
अर्थात,
AC/A'C = FN/A'F. ( समी. (1) तथा (2) से)
वक्र पृष्ठ N के अत्यंत समीप है।
इसलिए,
NP = neglected
अतः
AC/A'C = FP/A'F
AP-CP/ CP-A'P = FP/(A'P-FP)
-u+r/-r+v = -f/-v+f
(-u+r)(-v+f) = -f(v-r)
uv - uf - rv + rf = -fv + rf
uv = uf + rv - fv
uv = uf + 2fv - fv ( f = r/2, r = 2f )
uv = uf + fv
uv = f ( u + v )
1/f = ( u + v )/uv
1/f = u/uv + v/uv
1/f = 1/v + 1/u Proved

प्रकाश का अपवर्तन




जब प्रकाश की किरण किसी पारदर्शी माध्यम से दूसरे किसी पारदर्शी माध्यम में प्रवेश करती है तो वह अपनी मार्ग से सीधी ना जाकर विचलित हो जाती है , इस घटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।
अथवा,
जब प्रकाश की किरण विरल माध्यम से सघन माध्यम में प्रवेश करती है तो वह अभिलंब की तरफ झुक जाती है इसी प्रकार जब प्रकाश की किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है तो अभिलंब से दूर हट जाती है जिसे हम प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।
( सघन= घना, विरल= कम घना )

अपवर्तन का नियम------

इस नियम को स्नेल का नियम भी कहते हैं।
स्नेल ने प्रयोगों द्वारा अपवर्तन के निम्नलिखत नियम प्रतिपादित किए

1.आपतित किरण ,अपवर्तित किरण तथा अपवर्तक पृष्ठ आपतन बिंदु पर डाला गया अभिलंब तीनों एक ही तल में होते हैं ।
2. किन्हीं पारदर्शी माध्यम युग्म के लिए आपतन कोण की ज्या(sine) तथा अपवर्तन कोण की ज्या(sin) का अनुपात एक स्थिरांक होता है।
आपतन कोण (i) तथा अपवर्तन कोण(r) वे कोण हैं जो आपतित किरण तथा अपवर्तित किरण क्रमशः अभिलंब के साथ बनती हैं।
अतः 
किसी माध्यम का अपवर्तनांक =
निर्वात में प्रकाश की चाल / माध्यम में प्रकाश की चाल
n = sin i / sin r
जहां,
n एक स्थिरंक है,जिसे पहले माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक कहते हैं।

प्रिज्म में प्रकाश का अपवर्तन

प्रिज्म में पहले फलक AB पर आपतन कोण‌ i तथा अपवर्तन कोण r1 है जबकि दूसरे फलक AC पर आपतन कोण‌ r2 तथा अपवर्तन कोण या निर्गत कोण e है
अपवर्तन किरण तथा आपतित‌ किरण के बीच का कोण ∆ विचलन कोण है
चतुर्भुज AQNR में,
∠A+∠QNR = 180° __________ (1)
∆QNR से, ∠r1+∠r2+∠QNR = 180° ________ (2) 
समीकरण (1) and (2) से ___
∠A+∠QNR = ∠r1+∠r2+∠QNR
∠A = ∠r1+∠r2 _________ (3)
चूंकि,
r1=r2 = r ______ (4)
क्योंकि,
∠i =∠e
अतः
A = r+r _____( समी.(4) से)
A = 2r r = A/2 ______ (5)
चूंकि,
δ दोनों फ्लकों पर विचलन का योग है
अतः
δ=( i - r1 )+( e - r2 )
δ= i + e - A ________ (6)
चूंकि
δ= δm (विचलन कोण)
समी. (6) से,
δm = i + i - A _______ ( i = e )
δm = 2i - A
i = ( δm + A ) / 2 _______ (7)
हम जानते हैं कि
n = sin i/ sin r
n= sin i [(A+ δm)/2] / sin A/2
{ समी (4) और (7) से }

लेंस द्वारा अपवर्तन ------ (Refraction by lens)


लेंस दो वक्र पृष्ठो से घिरा हुआ कोई एक पारदर्शी माध्यम जिसका एक या दोनों पृष्ठ गोलिय है लेंस कहलाता है।
लेंस दो प्रकार के होते हैं
1. उत्तल
2. अवतल 

उत्तल लेंस (Convex lens)

किसी लेंस में बाहर की ओर उभरे दो गोलिय पृष्ठ को उत्तल लेंस कहते है। यह किनारों की अपेक्षा बीच में मोटा होता है उत्तल लेंस प्रकाश किरणों को अभिसरीत करता है इसलिए इसे अभिसारी लेंस भी कहते है।

अवतल लेंस (Concave lens)

किसी लेंस में अंदर की ओर वक्रीत दो गोलिय पृष्ठों से घिरा होता है। यह बीच की अपेक्षा किनारों पर मोटा होता है।
ऐसे लेंस प्रकाश किरणों को अपसरित करते है इसलिए इसे अपसारी लेंस भी कहते हैं।

किरण आरेख के उपयोग द्वारा लेंसों से प्रतिबिंब बनना 
(image making from lense using ray diagram)

1. बिंब से, मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली कोई प्रकाश की किरण उत्तल लेंस से अपवर्तन के पश्चात लेंस के दूसरी ओर मुख्य फोकस से गुजरेगी तथा अवतल लें कि स्थिति में प्रकाश की किरण लेंस के दूसरी ओर मुख्य फोकस से अपसरीत होती प्रतीत होती है।



2.मुख्य फोकस से होकर गुजरने वाली प्रकाश की किरण उत्तल लेंस से अपवर्तन के पश्चात लेंस मुख्य अक्ष के समांतर निर्गत होती है तथा अवतल लेंस के मुख्य फोकस पर मिलती प्रतीत होने वाली प्रकाश की किरण अपवर्तन के पश्चात मुख्य अक्ष के समांतर निर्गत होती प्रतीत होती है



3.दोनों लेंसों के प्रकासिक केंद्र से होकर गुजरने वाली प्रकाश की किरण अपवर्तन के पश्चात बिना किसी बिचलन के सीधी अपने मार्ग से निकल जाती है।





लेंस की क्षमता (Capacity of lens) 

प्रकाश के किरणों को लेंस द्वारा मोड़ लेने की क्षमता को लेंस की क्षमता कहते हैं।
लेंस की क्षमता को P से व्यक्त‌ करते हैं इसका मात्रक डायोप्टर‌ होता है।
1D = 1/m डायोप्टर‌


यदि लेंस की फोकस दूरी f हो तो लेंस की क्षमता 
tan δ = h/f
यदि 
h=1
tan δ = 1/f
δ = 1/f (δ के लघु मान के लिए)
अतः
P = 1/f

लेंस सूत्र तथा आवर्धन (Lens formula and magnification)

जिस प्रकार हमने गोलिय दर्पणों के लिए सूत्र ज्ञात किया था उसी प्रकार गोलिय लेंसो के लिए भी लेंस सूत्र स्थापित किया गया है।
यदि बिंब दूरी (u) प्रतिबिंब दूरी (v) तथा फोकस दूरी (f) हो तो
1/v - 1/u = 1/f

किसी लेंस की आवर्धन प्रतिबिंब की ऊंचाई तथा बिंब की ऊंचाई के अनुपात को कहते हैं। इसे m से निरूपित करते हैं।
यदि बिंब की ऊंचाई (h) हो था लेंस द्वारा बनाए गए प्रतिबिंब की ऊंचाई (h') हो तो
m = प्रतिबिंब की ऊंचाई/बिंब की ऊंचाई
m = h'/h
लेंस द्वारा उत्पन्न आवर्धन, बिंब की दूरी (u) तथा प्रतिबिंब की दूरी (v) से भी संबंधित है
आवर्धन(m) = h'/h
(m) = v/u

लेंस से संबंधित संख्यात्मक प्रश्न (Numerical question related to lens)

1. किसी अवतल लेंस की फोकस दूरी 15 cm है। बिंब को लेंस से कितनी दूरी रखे कि इसके द्वारा बिंब के लेंस से 10 cm दूरी पर प्रतिबिंब बने? लेंस द्वारा उत्पन्न आवर्धन भी ज्ञात कीजिए।

हल-

अवतल लेंस द्वारा सदैव है आभासी, सीधा प्रतिबिंब उसी ओर बनता है जिस ओर बिंब रखा होता है।
प्रतिबिंब दूरी v = -10 cm
फोकस दूरी f = -15 cm
बिंब दूरी u= ?
Formula-
1/v - 1/u = 1/f
1/u = 1/v - 1/u
1/u =(1/-10) - (1/-15)
1/u = (1/-10) + 1/15
1/u = -1/30
u = -30 cm ( बिंब की दूरी )
आवर्धन,m = v/u
m = -10/-30
m = +1/3
यहां धनात्मक चिन्ह यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब सीधा तथा आभासी बनेगा।

2. कोई 2.0 cm लंबा बिंब 10 cm फोकस दूरी के किसी उत्तल लेंस के मुख्य अक्ष के लंबवत रखा है। बिंब के लेंस की दूरी 15 cm है। प्रतिबिंब की प्रकृति, स्थिति तथा साइज ज्ञात कीजिए। इसका आवर्धन भी ज्ञात कीजिए।

हल-

बिंब की ऊंचाई h = +2.0 cm
फोकस दूरी f = +10 cm
बिंब की दूरी u = -15 cm
प्रतिबिंब दूरी v = ?
प्रतिबिंब की ऊंचाई h' = ?
Formula_
1/v - 1/u = 1/f
1/v = 1/f + 1/u
1/v = (-1/15 )+ ( 1/10 )
1/v = 1/30
v = +30
v का धनात्मक चिन्ह यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब लेंस के प्रकासिक केंद्र के दाईं ओर 30 cm की दूरी पर बनता है प्रतिबिंब वास्तविक तथा उल्टा है।
आवर्धन,m = h'/h = v/u
अथवा,
प्रतिबिंब की ऊंचाई h' = mh 
h' = h(v/u)
h' = 2(+30/-15)
h' = 2(-2)
h' = -4.0 cm
आवर्धन,m = v/u
m = +30/-15
m = -2 cm

m तथा h' के ऋणात्मक चिन्ह यह दर्शाते हैं कि प्रतिबिंब उल्टा तथा वास्तविक है। यह मुख्य अक्ष के नीचे बनता है
इस प्रकार वास्तविक उल्टा तथा 4.0 cm लंबा प्रतिबिंब लेंस के दाईं ओर लेंस से 30 cm दूरी पर बनेगा। यह प्रतिबिंब, बिंब से दोगुना होगा।

इन्द्रधनुष का बनना / इन्द्रधनुष कैसे बनता है ( How to make a rainbow )

जब सूर्य का प्रकाश वर्षा की बूंद में प्रवेश करता है तो वह अपने मार्ग से अपवर्तित हो जाता है, जिसके कारण श्वेत प्रकाश की तरंगदैघ्र्य अलग - अलग हो जाते हैं।
तो जिसका तरंगदैघ्र्यउच्च होता है (लाल) वह सबसे कम मुड़ती है जबकि निम्न तरंगदैघ्र्य (बैगनी) वह सबसे अधिक मुड़ती है। 

इसके बाद ये संघटक किरणें बूंद के अंदर पृष्ठ से टकराती हैं और यदि बूंद पृष्ठ पर अभिलंब और अपवर्तित किरण के बीच का कोण क्रान्तिक कोण ( 48°) से अधिक बनता है तो प्रकाश बूंद के अंदर ही परावर्तित हो जाती है। यह परावर्तित प्रकाश, बूंद से बाहर निकलते समय पुनः अपवर्तित हो जाता है। 
तो यह पाया जाता है कि सूर्य से आने वाले प्रकाश किरण के सापेक्ष बैगनी प्रकाश 40° के कोण पर तथा लाल प्रकाश 42° के कोण पर निर्गत होती है। अन्य वर्णों के तरंगदैघ्र्य के लिए कोणों के मान लाल तथा बैगनी तरंगदैघ्र्य के बीच में होते हैं।


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