Friday, May 22, 2020

मंदाकिनी | दुग्धमेखला | Galaxy | Milkyway in hindi

मंदाकिनी(Galaxy)


मंदाकिनी अरबों तारों का एक विशाल निकाय है। तारे मंदाकिनियों के साथ बंधे रहते हैं इसके लिए चारो मौलिक बलों गुरुत्वाकर्षण बल, विद्युत चुम्बकीय बल, स्ट्रॉन्ग बल तथा दृढ़ बल में गुरुत्वाकर्षण बल जिम्मेदार होता है।

ब्रह्माण्ड में लगभग 100 अरब मंदाकिनियां हैं और प्रत्येक मंदाकिनी में औसतन 100 अरब तारे हैं। यानी ब्रह्माण्ड में कुल तारों की संख्या 10²² है।
प्रत्येक मंदाकिनी में तारों के अतिरिक्त गैस तथा धूल भी होते हैं। मंदाकिनी का 98% भाग तारों से तथा 2% गैस तथा धूल से बना होता है।
मंदाकिनी के विशालता के कारण इसे प्रायद्वीप ब्रह्माण्ड भी कहा जाता है।

मंदाकिनी का वर्गीकरण(Classification of Galaxy)


मंदाकिनियों को प्रायः उनके आकृति के आधार पर तीन वर्गो में बांटा गया है

  • सर्पिल
  • दीर्घवृत्तीय
  • अनियमित
अब तक की ज्ञात मंदाकिनियों में 80% सर्पिल, 17% दीर्घवृत्तीय तथा 3% अनियमित आकार की है।
हमारी मंदाकिनी दुग्धमेखला या आकाशगंगा और इसकी सबसे नजदीकी मंदकिनी देवयानी (Andromeda) सर्पिल आकार वाली मंदाकिनी है। सर्पिल मंदाकिनियां दूसरी मंदाकिनियों से काफी बड़ी होती है।

दुग्धमेखला(Our own galaxy The Milkyway)


हमारा सौरमंडल, दुग्धमेखला या आकाशगंगा नामक मंदाकिनी का सदस्य है। इसकी ब्यास लगभग 10⁵ प्रकाश वर्ष और यह मंथन गति से चक्कर काट रही है। 
दुग्धमेखला मंदाकिनी, अपने केंद्र के चारो ओर धीरे_धीरे धुमती है और तारे इसके केंद्र के चारो ओर धीरे_धीरे घूमते हैं। सूर्य भी (सौरमंडल सहित) इसके केंद्र के चारो ओर घूमता है। इसे एक परिक्रमा पूरा करने में लगभग 250 करोड़ वर्ष लगता है। पृथ्वी पर लोग, दुग्धमेखला मंदाकिनी का अभिमुख दृश्य देख पाते हैं, क्योंकि पृथ्वी स्वयं इस मंदाकिनी का हिस्सा है।

हमारी मंदाकिनी में तारे चपटी चक्रीकनुमा संरचना में अन्तर्विष्ट होते हैं जो अन्तरिक्ष के अंदर 10⁵ प्रकाश वर्ष तक फैली होती है। तारों की चक्रिका केंद्र पर काफी मोटी होती है जो मंदाकिनी के केंद्र पर तारों के अपेक्षाकृत उच्च सांद्रण को दर्शाता है। 

हमरा सूर्य दुग्धमेखला मंदाकिनी के केंद्र से काफी दूर है। यदि आकाश स्वच्छ है, तो दुग्धमेखला मंदाकिनी अंधेरी रात में उत्तर से दक्षिण आकाश को हल्का सफेद तारों की चौड़ी पट्टी के रूप में प्रतीत होती है, जो करोड़ों टिमटिमाते तारों से मिलकर बनी है। अंधेरी रात में पृथ्वी से देखने पर यह आकाश की बहती हुई नदी की तरह प्रतीत होती है, यह आकाश गंगा कहलाती है।



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