Thursday, May 14, 2020

भौतिक जगत | What is physical world in hindi full chapter


भौतिक जगत


बल की सही औधारणा न्यूटन के गति विषयक नियमों से दी जाती है सूक्ष्म संसार तथा स्थुल संसार मे भी हमे अनेक बलों का अनुभव करते हैं।
स्थुल संसार में गुरुत्वाकर्षण बल तथा विद्युत् चुंबकिय बल को अनुभव किया जाता है ।
क्यूंकि इन दोनो का परास अनन्त होता है।
जबकी सूक्ष्म संसार में नाभिकीय बलों वैधूत और चुम्बकीय बलों तथा रेडियोऐक्टिव छय में क्षीण नाभिकीय बल का अनुभव किया जाता है।

प्रकृति में मुल बल निम्न हैं ____
1.गुरुत्वाकर्षण बल
2.विद्युत् चुम्बकीय बल
3.प्रबल नाभिकीय बल
4.क्षीण नाभिकीय बल

1- गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational Force)

यह प्रकृति में सदैव दो पिंडो के बीच उनके द्रव्यमानो के कारण उत्पन्न होता है।
यह सदैव आकर्षण बल है।
इस बल के अनुसार ,
" किन्ही दो वस्तुओं के बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल दोनो वस्तुओं के द्रव्यमनो के गुणनफल के समनुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपती होता है"।
माना दो वस्तु जिनके द्रव्यमान क्रमश: m1 व m2 है तथा उनके बीच की दूरी r है।
अत: इनके बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल

F∝m₁.m₂_____(1)
F∝1/r²______(2)
समीकरण (1) व (2) से
F∝m₁.m₂/r²
F=G.m₁m₂/r²
जहां G एक नियतांक है। जिसे सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक कहते हैं।
तथा इसका मान,
6.67×10⁻¹¹ N.M²/Kg² होता है।
अतः गुरुत्वाकर्षण बल को सार्वत्रिक बल भी कहते हैं।

2- विद्युत् चुम्बकीय बल(Electro Magnetic Force)

यह आवेशित कणों के बीच कार्य करने वाला बल है। यदि आवेश एक निश्चित दूरी पर विराम: अवस्था में होतो, उनके बीच कार्य करने वाला बल स्थिर वैधुत बल कहलाता है। जिसका अधययन कूलाम ने किया था।
अत: इसे कूलाम बल भी कहतें हैं ।
इस बल के अनुसार,
"किन्ही दो स्थिर आवेशो के बीच लगने वाला कूलाम बल दोनो आवेशो के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बिच्की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमनुपाती होता है।"
समीकरण (1) व (2) को मिलाने पर
F∝q₁.q₂/r²
F=K.q₁.q₂/r²
जहां K एक नियतांक है।
इसका मान,
1/4π€o=9×10⁹ N.M²/C²
जहां €o निर्वात की वैधुतशिलत है।
इसका मान,
8.86×10⁻¹² Kg²/NM²

K का मान माध्यम के वैधूत गणों पर निर्भर करता है।
जब आवेश गतिमान होता है तो उस पर एक चुम्बकीय बल भी कार्य करता है। सामान्यत: विद्युत् तथा चुम्बकीय क्षेत्रों को पृथ्थक नही किया जा सकता है। क्यूंकि एक परिवर्ती चुम्बकीय क्षेत्र विधुत क्षेत्र को उत्पन्न करता है।
अत: अलग-अलग न हो सकने वाले विद्युत् तथा चुम्बकीय क्षेत्र को संयुक्त रुप से विद्युत्-चुम्बकीय क्षेत्र कहतें हैं तथा इन क्षेत्रों से उत्पन्न होने वाले बलों को विद्युत् चुम्बकीय बल कहतें हैं ।

3-प्रबल नाभिकीय बल(Strong Nuclear Force)

नाभिक के न्युक्लिआनो को बांधने के लिये आवश्यक बल को प्रबल नाभिकीय बल कहतें हैं।यह बल आवेश पर निर्भर नहीं करता है।
न्युट्रान-न्युट्रान, प्रोटान-प्रोटान, प्रोटान-न्युट्रान के बीच यह बल उत्पन्न होता है।
आधुनिक खोजों मे क्वार्ट-क्वार्ट के बीच भी प्रबल नाभिकीय बल उत्पन्न होता है क्यूंकि प्रोटान तथा न्युट्रान,क्वार्ट जैसे सूक्ष्म कणो से मिलकर बने हैं ।

प्रबल नाभिकीय बल के गुण

यह प्रकृति मे सबसे प्रबल बल है।प्रबल नाभिकीय बल विधुत चुम्बकीय बलों से 100 गुना अधिक प्रबल होता है।
यह बल आवेश पर निर्भर नही करता है।
यह बल लघु परास (10⁻¹⁵m) वाला बल है। यह केवल नाभिक के भीतर ही प्रभावित होता है।

4-क्षीण नाभिकीय बल(Weak nuclear force)

कुछ नाभिकीय घटनाओं जैसे रेडियोएक्टिव नाभिक के β_क्षय में तथा मूल कणों के बीच कार्य करने वाला बल क्षीण नाभिकीय बल कहलाता है।
नोट- β एक रेडियोएक्टिव नाभिक, एक इलेक्ट्रॉन तथा एक एण्टीन्यूट्रान उत्सर्जित करता है।
क्षीण नाभिकीय बल भी क्षीण परास (10⁻¹⁶m) वाला बल हैताथा यह गुरुत्वाकर्षण बल से प्रबल होता है।

सभी मूल बल किसी विशेष अभिलाक्षणिक कण के विनिमय से प्राप्त होता है।
गुरूत्वीय बल- ग्रेविटान के विनिमय से उत्पन्न होती है।
विद्युत् चुम्बकीय बल- फोटॉन के विनिमय से प्राप्त होती है।
प्रबल नाभिकीय बल- न्योक्लिंआनों के बीच मेसानो के विनिमय से प्राप्त होता है।
क्षीण नाभिकीय बल- बोसानो के विनिमय से प्राप्त होता है।

भौतिक नियमों की प्रकृति

विभिन्न भौतिक समय प्रक्रमों में कुछ भौतिक राशियां समय के साथ बदलती हैं कुछ भौतिक राशियां समय के साथ नियत रहती, हैं वे राशियां जो नियत रहती हैं। संरक्षित राशियां कहलाती है तथा ये भौतिक के संरक्षण नियम का पालन करती हैं तथा भौतिक प्रक्रम विभिन्न प्रकार के बलों से नियंत्रित होते हैं।

कुछ संरक्षण के नियम निम्न है-

  • ऊर्जा संरक्षण
  • रेखीय संवेग संरक्षण
  • कोणीय संवेग संरक्षण
  • द्रव्यमान ऊर्जा संरक्षण
  • आवेश संरक्षण

1. ऊर्जा संरक्षण(Conservation of energy)

यदि किसी वस्तु पर कार्य करने वाला बल संरक्षी हो तो निकाय की कुल यांत्रिक ऊर्जा ( गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा ) का योग नियत रहती है। यह यांत्रिक ऊर्जा के संरक्षण का नियम है।
यदि बल संरक्षी नहीं है तो विश्व की कुल ऊर्जा नियत रहती है। यह ऊर्जा संरक्षण का व्यापक नियम है तथा यह नियम सभी बलों तथा सभी प्रकार की ऊर्जा रूपान्तरणों के लिए सत्य है।

2. रेखीय संवेग संरक्षण(Conservation of linear momentum)

यदि किसी निकाय पर वाह्य बल शून्य है तो निकाय की कुल रेखीय संवेग संरक्षित होता है। यह रेखीय संवेग संरक्षण का नियम है।
m₁v₁+m₂v₂+m₃v₃________+mₙvₙ= नियत

3. कोणीय संवेग संरक्षण(Conservation of Angular momentum)

बल आघुर्ण की अनुपस्थिति में किसी पिंड का कुल कोणीय संवेग नियत रहता है। इसे कोणीय संवेग का नियम कहते हैं।
यदि,
बल आघूर्ण τ=0
J₁+J₂+J₃_____+Jnₙ=नियत
m₁v₁r₁+m₂v₂r₂+______+mₙvₙrₙ=नियत
कोणीय संवेग- रेखीय संवेग के आघुर्ण को कोणीय संवेग कहते हैं।

4. द्रव्यमान ऊर्जा संरक्षण(Mass-Energy conservation)

आइंस्टीन के अनुसार,
द्रव्यमान तथा ऊर्जा पृथक पृथक अस्तित्व वाली भौतिक राशियां नहीं है बल्कि एक ही राशि के दो रूप हैं।
द्रव्यमान को ऊर्जा में तथा ऊर्जा को द्रव्यमान बदला जा सकता है।
द्रव्यमान तथा ऊर्जा के बीच तुल्य संबंध
E=mc²
जहां c प्रकाश की चाल है
c=3×10⁸ m/sec

उदाहरण---
नाभिकीय अभिक्रिया में कुल न्यूकलियानो की संख्या नियात रहती है जबकि प्रक्रिया में क्रिया करने वाले नाभिकों का कुल द्रव्यमान क्रिया से पहले व बाद में नियत नहीं रहता है बल्कि अंतर हो जाता है। इस अंतर को द्रव्यमान क्षति कहते है। और यही द्रव्यमान क्षति ऊर्जा के रूप में प्रकट होती है।

5. आवेश संरक्षण(Conservation of charge)

एक विलगती निकाय का कुल आवेश संरक्षित रहता है। इन नियमों के अतिरिक्त सूक्ष्म निकायों जैसे नाभिकीय क्रियाओं में कुछ अन्य संरक्षण के नियम भी लागू होते हैं

उदाहरण---
  • युग्म उत्पादन
  • युग्म विनाश

भौतिक का प्रयोजन तथा उत्तेजना


भौतिक विज्ञान को मूल रूप से दो भागो में बांटा गया है
  • स्थूल
  • सूक्ष्म

भौतिकी के स्थूल प्रभाव के अंतर्गत पृथ्वी तथा खगोलीय स्तर की परिघटनाएं सम्मिलित हैं। जबकि सूक्ष्म भौतिकी में परमाणविक, आण्विक तथा नाभिकीय परिघटनाएं सम्मिलित हैं। स्थूल परिघटनाओं की व्याख्या के लिए क्लासिकल यांत्रिक के सिद्धांतो का प्रयोग किया जाता है।

भौतिक के सूक्ष्म तथा स्थूल प्रभाव के अंतर्गत


परमाणुओं एवं नाभिकों से संबंधित घटनाओं की व्याख्या की जाती है। इसके अध्ययन के लिए आधुनिक क्वांटम यांत्रिकी का प्रयोग किया जाता है। साथ ही साथ द्रव्य के संघठन एवं संरचना मूल काणों इत्यादि के पारस्परिक क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है।
इस प्रकार भौतिक विज्ञान स्थूल तथा सूक्ष्म विज्ञान है तथा सभी विज्ञान कि शाखाओं का आधार है अर्थात भौतिक विज्ञान में अजिवित विश्व की घटनाओं का अध्ययन किया जाता है जोकि जीवित प्राणियों के लिए लाभदायक है

Classical Mechanics की शाखाएं-

1.यांत्रिक

इस में ठोस, द्रव तथा गैस के नियमों का अध्ययन किया जाता है। यह न्यूटन के गति के नियमों तथा गुरुत्वाकर्षण के नियम पर आधारित है। इस शाखा में द्रव्यमान, जड़त्व, बल, ऊर्जा, शक्ति आदि भौतिक राशियों की व्याख्या की जाती है।

2. उष्मागतिकी

भौतिक की इस शाखा में ऊष्मा का कार्य के रूप में बदला, एवं स्थानांतरण के कारण निकाय की यांत्रिक ऊर्जा, ताप एवं ऊर्जा आदि में परिवर्तन का अध्ययन किया जाता है।

3.प्रकाशिकी

भौतिक कि इस शाखा में प्रकाश पर आधारित घटनाओं जैसे परावर्तन, अपवर्तन, विवर्तन, व्यक्तिकरण के साथ साथ दूरदर्शी एवं सूक्ष्मदर्शी के कार्य विधि का वर्णन किया जाता है।

4. दोलन तथा तरंगे

दोलन तीन प्रकार के होते हैं
  • मुक्त
  • प्रमोदित
  • अबमदी

भौतिक की इस शाखा में विभिन्न वस्तुओं के कम्पन्नों, कंपित वस्तु द्वारा उत्पन्न तरंगों के कार्य का अध्ययन किया जाता है। इसी से हमें पता चलता है कि हमारी आवाज़ किस प्रकार आगे बढ़ती है।

5. विद्युत् गतिकी

विद्युत् विज्ञान कीनिस शाखा में विद्युत् चुम्बकीय तरंगों के परिघटनाओं की व्याख्या की जाती है। साथ ही साथ धारावाहि चालक की चुम्बकीय आयनमंडल में रेडियो तरंगों का संचरण आदि का अध्ययन किया जाता है।



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