Tuesday, September 15, 2020

ऋजु रेखीय पथ पर गति | speed on the linear path in hindi full chapter

दूरी एवं विस्थापन

1.दूरी 
माना कोई वस्तु x- अक्ष के अनुदिश है। t₁ समय में वस्तु मूल बिंदु से A पर पहुंच जाता है तथा t₂ समय में वस्तु मूल बिंदु से B पर पहुंच जाता है। 
AB=(x₂-x₁)=∆x
समयांतराल,
∆t=(t₂-t₁)
अतः किसी दिए हुए समयांतराल में दो बिंदुओं के बीच की लंबाई को दूरी कहते हैं।

2.चाल 
यदि दो बिंदुओ के बीच की दूरी ∆x हो तथा बीच समयांतराल ∆t हो,
जहां ∆t=(t₂-t₁)
अतः वस्तु की चाल को निम्न प्रकार से परिभाषित किया जाता है_
चाल=दूरी/समय
चाल=∆x/∆t
यदि ∆t=1 सेकंड हो तो,
चाल = दूरी
अतः अकांक समय में गतिशील वस्तु द्वारा चली गई दूरी को चाल कहते हैं। इसका मात्रक मीटर/सेकंड होता है। इसकी विमा [LT⁻¹]

3.विस्थापन
यह एक सदिश राशि है। जब दूरी को मापन दिशा को ध्यान में रखकर करते हैं, तो वह दूरी विस्थापन कहलाती है। अतः x- अक्ष के अनुदीश गतिशील वस्तु द्वारा दो बिंदु A तथा B के बीच विस्थापन,
=∆x(x₂-x₁)
यदि x₂>x₁ हो तो ∆x धनात्मक होगा,
अतः इस आधार पर गतिशील वस्तु के वेग की गणना कर सकते हैं।
वेग=विस्थापन/समय
यदि समय 1 सेकंड हो तो,
वेग=विस्थापन
अतः एकांक समय में गतिशील वस्तु द्वारा विस्थापित दूरी को वेग कहते हैं। विस्थापित दूरी किसी दिशा को प्रदर्शित करती है।वेग सदीश राशि है तथा इसका मात्रक मीटर /सेकंड होता है। इसकी विमा [LT⁻¹] होती है।

4.एक समान गति
जब कोई गतिमान वस्तु समान समय अंतरालों में समान दूरी तय करे तो उस वस्तु की गति एक समान गति कहलाती है।

5.असमान गति (uneven speed)
जब कोई गतिमान वस्तु असमान समय अंतरालों में असमान दूरी तय करे तो उस वस्तु की गति एक असमान गति कहलाती है।

6.औसत चाल
किसी वस्तु द्वारा किसी समयांतराल में चली गई कुल दूरी तथा उस समयांतराल के अनुपात को वस्तु की औसत चाल कहते है। इसे V से प्रदर्शित करते हैं।
V=वस्तु द्वारा चली गई कुल दूरी / समयांतराल
यदि किसी वस्तु द्वारा ∆t समय में चली गई कुल दूरी ∆s हो तो,
औषत चाल V=∆s/∆t

7.तात्क्षणिक चाल (Instantaneous movement)
इसे v से प्रदर्शित करते हैं तथा गणितिय रूप से निम्न प्रकार से परिभाषित करते हैं।
तात्क्षणिक चाल v=limₓ→₀ ∆s/∆t, (x=∆t)
या, ds/dt
जहां ds/dt, s का t के सापेक्ष अवकलन गुणांक है।
Formula अवकलन के लिए,
d(xⁿ)/dx=n×n⁻¹

Example-
यदि किसी कण की दूरी समय के साथ निम्न समीकरण द्वारा प्रदर्शित करते हैं।
S=2t²+3t
तो ज्ञात कीजिए t=0 पर कण की तत्क्षणिक चाल
Solution-S=2t²+3t_____(1)
समीकरण (1) को t के सापेक्ष अवकलन करने पर
ds/dt=4t²⁻¹+3t¹⁻¹
ds/dt=4t+3
(ds/dt)=4×0+3
(ds/dt)=3 मीटर/सेकंड

वेग
यदि किसी वस्तु का एकांक समय में विस्थापन एकांक हो, तो उस वस्तु का वेग 1 meter/sec होगा। 

एक समान वेग 

यदि किसी वस्तु का विस्थापन समान समय अंतरालों में समान हो तो वस्तु का वेग एक समान वेग होगा।

परिवर्तित वेग
यदि किसी वस्तु का विस्थापन समान समय अंतरालों में भिन्न भिन्न हो तो इस स्थिति में वस्तु का वेग परिवर्तित वेग कहलाता है। किसी भी वस्तु के वेग के बदलने निम्नलिखित कारण होते हैं_
1.वस्तु के वेग का परिणाम बदल रहा हो अर्थात,
(a).विस्थापन के मान में परिवर्तन हो रहा हो।
(b).वस्तु के गति की दिशा बदल रही हो।
2.वेग का परिणाम तथा दिशा दोनों साथ साथ बदल रहा हो।

औसत वेग 
किसी निश्चित समय अंतराल ∆t में हुए कुल विस्थापन ∆s का समय अंतराल ∆t के साथ अनुपात वस्तु का औसत वेग कहलाता है।
औसत वेग (⃗vₐᵥ)=∆s/∆t मीटर/सेकंड

Question- यदि कोई व्यक्ति प्रारंभ में मंज़िल से 3 किमी पूर्व की ओर एवं 4 किमी उत्तर की ओर चल कर अपनी यात्रा पूरी करता है, तो ज्ञात कीजिए
(a).व्यक्ति द्वारा चली गई कुल दूरी
(b).व्यक्ति का विस्थापन
Solution-
(a).कुल दूरी=3+4=7 किमी
(b).विस्थापन OB=√(OA)²+(AB)²
⁼√(9+16)
=√(25)
=5 किमी

तात्क्षणिक वेग
किसी छड़ (∆t→0) पर किसी गतिशील वस्तु का वेग उसका तात्क्षणिक वेग कहलाता है। तात्क्षणिक वेग ⃗v
⃗v=Limₓ→₀∆s/∆t
where x=∆t
⃗v=ds/dt 

वेग तथा चाल में अंतर

1.किसी वस्तु का वेग धनात्मक, ऋणात्मक अथवा शून्य हो सकता है जबकि वस्तु की चाल धनात्मक या शून्य हो सकती है।
2.वेग एक सादिश राशि है जबकि चल एक अदिश राशि है तथा दोनों की विमाएं समान होती है।
3.एक सरल रेखा के अनुदिश वेग तथा चाल के मान एक ही होंगे।
4.चाल तथा वेग का अनुपात सदैव एक से बड़ा अथवा एक के बराबर होता है।
जब वेग तथा चाल एक सरल रेखा के अनुदिश हो , तो
चाल/वेग=1
यदि समान त्वरण से गतिशील किसी वस्तु का प्रारंभिक वेग u तथा अंतिम वेग v हो, तो उसका औसत वेग
⃗V (average)=(⃗u+⃗v)/2
⃗V (average)=(v₁t₁+v₂t₂)/t₁+t₂
Example-
यदि किसी वस्तु का 5 सेकंड में वेग 10 मीटर/सेकंड हो तथा 7 सेकंड में वस्तु का वेग 15 मीटर/सेकंड हो, तो वस्तु का औसत वेग_
⃗V (average)=[(10×5)+(15×7)]/7+5
⃗V (average)=155/12
⃗V (average)=12.91 मीटर/सेकंड

त्वरण


यह एक सदीश राशि है तथा इसे निम्न रूप से परिभाषित करते हैं।
"वेग परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं।"
इसकी विमा [LT⁻²] होती है।
त्वरण=(वेग में परिवर्तन)/समय
⃗a=∆⃗v/∆t m/sec²

एक समान त्वरण
यदि समान समय अंतरालों में किसी गतिशील वस्तु के वेग में परिवर्तन समान हो, तो वस्तु में उत्पन्न त्वरण एक समान त्वरण कहलाता है।

परिवर्तित त्वरण
यदि समान समय अंतरालों में वस्तु के वेग में परिवर्तन भिन्न हो, तो त्वरण परिवर्तित अथवा असमान त्वरण कहलाता है।

तात्क्षाणिक त्वरण / तात्कालिक त्वरण
किसी त्वरित कण के किसी समय वेग परिवर्तन की दर को तात्क्षाणिक त्वरण कहते हैं।
a=Limₓ→₀∆v/∆t
where x=∆t,
a=dv/dt
Then,
v=dx/dt
अतः
a=(d/dt)×(dx/dt)
a=d²x/dt²

ऋजु रेखीय गति का ग्रफिय निरूपण

ऋजु रेखीय गति का ग्रफिय निरूपण निम्न संबंधों में किया जाता है
x-t (दूरी-समय) ग्राफ
v-t (वेग-समय) ग्राफ
a-t (त्वरण-समय) ग्राफ
x-t (दूरी-समय) ग्राफ

x-t (दूरी-समय) ग्राफ--

इस ग्राफ में समय को x-अक्ष के अनुदीश तथा वस्तु के विभिन्न स्थितियों को y-अक्ष के अनुदीश प्रदर्शित करते हैं।
Use-एक स्थिर वस्तु एक समान वेग से गतिशील वस्तु तथा परिवर्ति वेग से गतिशील वस्तु की गति का अध्ययन किया जाता है।

1.यदि वस्तु की गति एक समान हो
ग्राफ एक सरल रेखा में होगा।
सरल रेखा की ढाल, कण और औसत चाल बताती है।
कण के औसत वेग तात्कालिक वेग के बराबर होता है।

2.यदि वस्तु की गति परिवर्ति हो

इस स्थिति में वस्तु का वेग समय के साथ परिवर्तित होता है।
इस स्थिति में खींचा गया ग्राफ वक्र होगा जिसका ढाल अलग अलग अंतरालों में अलग अलग होगा।
कण के औसत वेग तथा तात्क्षणिक‌ वेग अलग अलग होते हैं।

3.विभिन्न परिस्थितियों में वस्तु का समय के साथ विस्थापन
(a).

इस स्थिति में वस्तु विराम: अवस्था में है।

(b).
समय विस्थापन ग्राफ की प्रवणता/ढाल धनात्मक है। अतः वस्तु का नियत वेग से गतिशील है।

(c).

समय विस्थापन ग्राफ की प्रवणता/ढाल ऋणात्मक तथा नियत है और वस्तु नियत ऋणात्मक वेग से गतिशील है

(d).

समय विस्थापन ग्राफ की ढाल भिन्न भिन्न बिंदुओ पर भिन्न भिन्न है। किन्तु समय के साथ बढ़ रही है।

(e).

समय विस्थापन ग्राफ की ढाल समय के साथ परिवर्तित हो रही है।
O-A पर वस्तु का वेग बढ़ रहा है।
A-B पर वस्तु का वेग घट रहा है।
B पर वस्तु का वेग शून्य है।
B-C पर वस्तु का वेग ऋणात्मक है।

v-t (वेग-समय) ग्राफ--

इस ग्राफ की सहायता से किसी गतिशील वस्तु के विभिन्न समय अंतरालों पर वेग का मापन करके समय के साथ साथ ग्राफ खींचते हैं।
वेग को y-अक्ष के अनुदीश तथा समय को x-अक्ष के अनुदीश खींचते हैं।

1.यदि वस्तु एक समान वेग से गतिशील हो

वेग समय ग्राफ x-अक्ष के समांतर एक सरल रेखा होगी।
वेग समय ग्राफ तथा समय अक्ष से घिरा हुआ क्षेत्र का क्षेत्रफल वस्तु द्वारा दिए गए समय अंतराल में चली गई दूरी को व्यक्त करता है।
अतः उपरोक्त ग्राफ में (t₂-t₁) समय अंतराल में वस्तु द्वारा चली गई दूरी,
S=v(t₂-t₁)
S=आयत BC(t₂-t₁) का क्षेत्रफल

2.यदि वस्तु का वेग एक समान वेग से बढ़ रहा हो

(a).वेग समय ग्राफ का ढाल वस्तु के त्वरण‌ को प्रदर्शित करता है। सरल रेखा के बिंदु A पर वस्तु का वेग v₁ तथा दूसरे बिंदु C पर वस्तु का वेग v₂ है।
अतः समय अंतर (t₂-t₁) में वस्तु के वेग में परिवर्तन (v₂-v₁) है।
अतः वस्तु का त्वरण‌,
a= BC/AB
a=(v₂-v₁)/(t₂-t₁)
a=∆v/∆t
(b).यदि वस्तु एक समान वेग से गतिशील है तो उसका औसत त्वरण‌ और तात्कालिक त्वरण‌ दिनों बराबर होंगे।
औसत त्वरण‌=तात्कालिक त्वरण‌
∆v/∆t=dv/dt

3.यदि वस्तु परिवर्तित वेग से गतिशील है

इस स्थिति में बिंदु P व Q पर वस्तु का ढाल ज्ञात करने के लिए सरल रेखा PQ के संगत वेग में परिवर्तन (v₂-v₁) तथा समय अंतराल (t₂-t₁)=∆t हो तो,
औसत चाल,
⃗a=∆v/∆t
तथा तात्कालिक त्वरण‌,
⃗a=Limₓ→₀∆v/∆t
where x=∆t
⃗a=dv/dt

a-t (त्वरण-समय) ग्राफ--

1.यदि कण विराम: अवस्था में स्थित हो

यदि कण विराम: अवस्था में स्थित हो, तो विराम: में स्थित कण का वेग तथा त्वरण‌ शून्य होता है। अतः ग्राफ समय अक्ष पर अध्यारोपित होगा।

2.यदि वस्तु एक नियत वेग से गतिशील हो

अर्थात,
त्वरण‌=शून्य
इस स्थिति में ग्राफ समय अक्ष पर ही निरूपित होगा।

3.यदि वस्तु एक नियत त्वरण‌ से गतिशील हो

यदि वस्तु एक नियत त्वरण‌ से गतिशील हो, तो समय त्वरण‌ ग्राफ निम्न रूप से प्रदर्शित होगा।
इस ग्राफ की सहायता से किसी गतिशील वस्तु का किन्हीं दो समय अंतरालों t₁ व t₂ के मध्य हुए वेग परिवर्तन ∆v की गणना कर सकते हैं।
a=(वेग परिवर्तन)/समय
a=∆v/∆t
∆v=a.∆t meter/second

ग्राफिय विधि की सहायता से गति का समीकरण

जब कोई कण‌ एक सरल रेखा के अनुदिश एक समान त्वरण से गतिशील हो, तो ऐसे कण‌ के वेग, त्वरण, विस्थापन आदि राशियों के संबंधों को जिस गणितीय समीकरण द्वारा व्यक्त किया जाता है, उसे वस्तु के गति का समीकरण कहते हैं।

गति के निम्नलिखित समीकरण हैं
v=u+at
s=ut+at²/2
v²=u²+2as

ग्राफिय विधि की सहायता से गति के समीकरणों का निगमन

1.Velocity-Time Relation (v=u+at)

उपरोक्त ग्राफ की सहायता से,
माना कोई वस्तु एक समान त्वरण a से गतिशील है। इसका प्रारंभिक वेग u(t=0), t समय बाद कण का वेग v हो जाता है।
सरल रेखा AC का ढाल
त्वरण=लम्ब/आधार
a=BC/AB
a=(v-u)/t
at=v-u
v=u+at

2.Position-Time Relation (s=ut+at²/2)

उपरोक्त ग्राफ की सहायता से,
गतिशील वस्तु द्वारा चली गई दूरी 
s=वेग समय ग्राफ एवं समय अक्ष के बीच घिरा हुआ क्षेत्र
s=∆ABC+ABDO का क्षेत्रफल
s=1/2×(AB×BC)+(AB×BD)
s=1/2.t(v-u)+t×u
s=1/2.t(at)+ut
s=1/2.at²+ut
s=ut+1/2.at²

3.Position-Velocity Relation

उपरोक्त ग्राफ की सहायता से,
किसी गतिशील वस्तु द्वारा किसी क्षण t में चली गई दूरी
s=(समांतर भुजाओं का योग × उनके बीच की दूरी)/2
s=[(AO+CD)×OD]/2
s=[(u+v)×t]/2
From relation (1)
v=u+at
t=(v-u)/a
s=[(u+v)×(v-u)/a]/2
s=(v²-u²)/2a
v²=u²+2as

गुरुत्व त्वरण के अधीन गति

जब वस्तु h ऊंचाई से विराम: अवस्था से स्वतंत्र रूप से छोड़ा जाए
यदि t समय बाद कण का वेग v हो तो,
गति का समीकरण निम्न होगा
1.v=u+gt
v=0+gt
v=gt
2.h=ut+1/2.gt²
h=0+1/2.gt²
h=1/2.gt²
3.v²=u²+2gh
v²=0+2gh
v²=2gh
v=√(2gh)



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